आग ---
आग - कुछ कर गुजरने की
आग - अलग पहचान की
आग - अपने आप को साबित करने की
आग - सब कुछ पाने की जो हम पाना चाहते है
आग - कामयाबी की
आग - सफलता की
शांत आदमी मुर्दे के समान है जिसके साथ आदमी कुछ ही देर बिताना चाहेगा मै मानता हु जब तक एक आग नही होगी हममे तब तक हमारे सपने सपने रहेगे हकीकत नही बन सकते .....एक रॉकेट भी आग से ही अपनी कामयाबी की और बढ़ता है ..,और जिस दिन ये लग गयी उसदिन सारी मुसीबते , परेशानिया जल कर रख हो जाएगी ,
कैसे लगेगी ये आग -- ???
एक लक्ष्य लेने से जब १० आदमी आपके जूनून को देख कर आपको पागल कह दे समझ लीजिये लग गयी है आग ...."" संघर्ष न तकलीफे ..... तो क्या है मजा फिर जीने में , तूफान भी थम जायेगा यदि लक्ष्य लिया हो सीने में ""
दुष्यंत जी की एक कविता है ,,
हो गयी है पीर पर्वत सी अब तो पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
आज ये दिवार पर्दों की तरह हिलने लगी
शर्त लेकिन थी की ये बुनियाद हिलनी चाहिए
हर सड़क पर , हर गली में , हर नगर में , हर गाव में
हाथ लहराते हुए लोग दिखने चाहिए
सारी कोशिश है ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में न सही तो तेरे सीने में ही सही
"" हो आग कही भी , ये आग जलनी चाहिए ""---------